ग़ज़ल अभी सफ़र मेरा कहा खत्म हुआ, अभी सहर की आहट बाकी है l है जवां-जवां दिले – धड़कने, जिनमे उम्मीदों की झांकी है ll वो सज़र हूँ मैं तेरे हांथो का, जिसे…
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